सीवीवी क्या है: CVV कहाँ मिलता है और बिटकॉइन से CVV बेचने की पेशकशें क्यों अवैध हैं

सीधा जवाब

सीवीवी (CVV) कार्ड पर छपा सुरक्षा कोड है। यह कार्डधारक की निजी जानकारी है। इसे बेचना, खरीदना या किसी तीसरे को देना भारत में अपराध है। बिटकॉइन से CVV बेचने की कोई वैध वेबसाइट, ऐप या बाजार मौजूद नहीं है। "बिटकॉइन के साथ सीवीवी बेचें" जैसी पेशकशें धोखाधड़ी होती हैं। इनमें पैसे गंवाने का जोखिम रहता है और कानूनी कार्रवाई का जोखिम भी।

बिटकॉइन से सीवीवी बेचने वाली वेबसाइट: तथ्य, नियम और जोखिम

सीवीवी क्या है

CVV का पूरा नाम कार्ड वेरिफिकेशन वैल्यू है। CVC का मतलब कार्ड वेरिफिकेशन कोड है। दोनों एक ही चीज़ के नाम हैं। ऑनलाइन भुगतान के समय यह कोड जांचता है कि कार्ड भुगतान करने वाले के पास मौजूद है। CVV अलग होता है ATM पिन से, UPI पिन से और OTP से। CVV बदला नहीं जा सकता। कार्ड ब्लॉक होने पर नया कार्ड और नया CVV जारी होता है।

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CVV कहाँ मिलता है

  • वीज़ा, मास्टरकार्ड और रुपे कार्ड में: कार्ड के पीछे, सिग्नेचर स्ट्रिप के पास, 3 अंक।
  • अमेरिकन एक्सप्रेस कार्ड में: कार्ड के सामने, कार्ड नंबर के ऊपर, 4 अंक।
  • डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड दोनों पर CVV छपा होता है।
  • वर्चुअल कार्ड में CVV बैंक के ऐप या नेट बैंकिंग में दिखता है।
  • कार्ड नंबर के पहले 6 अंक बैंक और कार्ड नेटवर्क बताते हैं, बाकी अंक खाता पहचानते हैं।

CVV क्या नहीं है

CVV पिन नहीं है। CVV OTP नहीं है। CVV पासवर्ड नहीं है। CVV कार्ड नंबर का हिस्सा नहीं है। किसी बैंक कर्मचारी, ग्राहक सेवा एजेंट या सरकारी अधिकारी को भुगतान के लिए CVV की ज़रूरत नहीं होती।

बिटकॉइन से CVV बेचने की पेशकशें क्यों फर्जी हैं

बिटकॉइन भुगतान वापस नहीं होता। लेनदेन में पहचान छिपी रहती है। इसका फायदा उठाकर ठग लोगों से पैसे लेते हैं और गायब हो जाते हैं। आम पैटर्न यह होता है: पहले छोटी रकम का भुगतान मांगा जाता है, फिर बड़ी रकम, और अंत में कोई संपर्क नहीं करता। कुछ मामलों में ठग खुद को खरीदार बताते हैं और लोगों से CVV मांगते हैं। दोनों तरफ नुकसान होता है। CVV देने पर खाते से पैसे निकल सकते हैं और कार्डधारक पर भी कार्रवाई हो सकती है।

भारत में कानून क्या कहता है

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66C पहचान की चोरी पर लागू होती है। इसमें 3 साल तक कैद या 1 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। धारा 66D कंप्यूटर संसाधन के ज़रिए धोखा देने पर लागू होती है। इसमें 3 साल तक कैद और 1 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318 धोखाधड़ी से जुड़ी है और धारा 319 छद्म रूप से जुड़ी है। भुगतान कार्ड डेटा को बेचना या खरीदना इन प्रावधानों के दायरे में आता है।

अगर कोई CVV मांगे तो क्या करें

  1. कोड साझा न करें। फोन काट दें।
  2. बैंक को तुरंत सूचित करें और कार्ड ब्लॉक कराएं।
  3. राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
  4. हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। पहले 24 घंटे में शिकायत दर्ज होने पर रकम रोकने की संभावना बढ़ती है।
  5. बैंक लेनदेन विवरण और स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें।

जो बात याद रखें

बैंक और भुगतान कंपनियां कभी फोन, ईमेल या मैसेज पर CVV, OTP या पिन नहीं मांगतीं। CVV बेचने से जुड़ी कोई वैध कमाई नहीं है। ऐसी पेशकश करने वाला व्यक्ति या समूह अवैध काम कर रहा है। इस लेख में ऐसी किसी पेशकश का पता, लिंक या तरीका नहीं दिया गया है।

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