CVV/CVC क्या है और कहाँ मिलता है | सस्ता CVV बेचने वाली साइट की सच्चाई

सीधा जवाब

CVV या CVC कार्ड पर छपे 3 या 4 अंकों का कोड है। यह ऑनलाइन भुगतान में कार्डधारक की पुष्टि करता है। कोड कार्ड के पीछे या सामने छपा होता है। बैंक इसे SMS, ईमेल या फोन कॉल से कभी नहीं भेजता। कोई वैध दुकान CVV नहीं बेचती।

सीवीवी बेचने के लिए सस्ती और तेज़ दुकान

CVV/CVC क्या है

CVV का पूरा नाम Card Verification Value है। CVC का पूरा नाम Card Verification Code है। दोनों का काम एक है। कार्ड नेटवर्क भुगतान के समय इन अंकों को कार्ड नंबर के साथ जांचते हैं। 1990 के दशक के अंत में कार्ड नेटवर्क ने यह कोड जोड़ा। मकसद यह था कि चोरी हुए कार्ड नंबर से हर भुगतान पूरा न हो।

CVV क्या है और कार्ड पर कहाँ मिलता है

कार्ड पर कोड कहाँ मिलता है

  • Visa, Mastercard, RuPay: 3 अंक, कार्ड के पीछे हस्ताक्षर पट्टी के पास।
  • American Express: 4 अंक, कार्ड के सामने दाईं ओर, कार्ड नंबर के ऊपर।
  • हर नेटवर्क का नाम अलग है। Visa: CVV2। Mastercard: CVC2। American Express: CID। RuPay: CVV।

डिजिटल जगह जहाँ कोड दिखता है

  1. बैंक का मोबाइल ऐप: कार्ड डिटेल्स या View card विकल्प।
  2. नेट बैंकिंग: कार्ड मैनेजमेंट सेक्शन।
  3. कार्ड जारी करने वाली कंपनी का ऐप।

बैंक स्टेटमेंट पर CVV नहीं छपता। कुछ ऐप कोड देखने से पहले फिर से लॉगिन या OTP मांगते हैं।

सीवीवी सस्ता और तेज बेचने वाली साइट

सस्ता और तेज CVV बेचने वाली साइट क्या होती है

इंटरनेट पर ऐसी साइटें और चैनल मिलते हैं जो CVV, कार्ड नंबर और पिन बंडल में बेचने का दावा करती हैं। ये दुकानें नहीं हैं। ये चोरी किए गए कार्ड डेटा के बाजार हैं। डेटा स्किमिंग, फिशिंग पेज, डेटा लीक या कर्मचारी की मिलीभगत से आता है। ऐसी साइट पर खरीदना, बेचना और डेटा रखना तीनों भारत में अपराध हैं।

भारत में कानून

  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 66C: पहचान की जानकारी चुराना। 3 साल तक कारावास और 1 लाख रुपये तक जुर्माना।
  • धारा 66D: कंप्यूटर संसाधन से धोखाधड़ी। 3 साल तक कारावास और 1 लाख रुपये तक जुर्माना।
  • धारा 66: धारा 43 का अपराध सिद्ध होने पर 3 साल तक कारावास या 5 लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों।

ऐसी साइटों से नुकसान

  1. पैसा पहले लिया जाता है। डेटा बाद में नहीं मिलता।
  2. भुगतान क्रिप्टो या अनट्रेस यूजीआई से मांगा जाता है। पैसा वापस नहीं मिलता।
  3. खरीदार का अपना डेटा भी बिकता है।
  4. जाली फाइलों में मैलवेयर मिलता है।
  5. कार्ड नेटवर्क ऐसे लेनदेन फ्लैग करते हैं। खाता बंद हो सकता है।

CVV कहाँ नहीं मिलता

कोई बैंक, वॉलेट या ई-कॉमर्स कंपनी CVV नहीं बेचती। भुगतान गेटवे CVV सेव नहीं कर सकते। PCI DSS नियम के मुताबिक ऑथराइजेशन के बाद CVV सेव करना मना है। भारतीय रिजर्व बैंक ने कार्ड डेटा सेव करने पर रोक लगाई है। इसलिए सस्ता CVV बेचने वाली हर साइट गैरकानूनी है।

कोड सुरक्षित रखने के नियम

  • CVV किसी को न बताएं। बैंक कर्मचारी, कूरियर और ग्राहक सेवा इसे कभी नहीं मांगते।
  • OTP और CVV एक साथ किसी पेज पर न डालें।
  • ऑनलाइन भुगतान के लिए टोकनाइज्ड कार्ड इस्तेमाल करें।
  • कार्ड खोने पर बैंक को तुरंत सूचना दें।

धोखाधड़ी होने पर क्या करें

  1. बैंक को कॉल करें। कार्ड ब्लॉक कराएं।
  2. राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
  3. हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। देर होने पर पैसा वापस मिलना मुश्किल होता है।
  4. लेनदेन की तारीख, रकम और संदेश सेव रखें।

संक्षेप: CVV कार्ड पर छपा सुरक्षा कोड है। इसका असली ठिकाना कार्ड और बैंक ऐप है। इसे बेचने या खरीदने वाली कोई वैध साइट मौजूद नहीं है।

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