सीवीवी बेचने की कीमत कम और तेज: तथ्य, कानून और जोखिम

सीवीवी क्या है

सीवीवी या सीवीसी कार्ड पर छपा 3 अंकों का कोड है। वीज़ा, मास्टरकार्ड और रुपे कार्ड पर यह पीछे हस्ताक्षर पट्टी के पास होता है। अमेरिकन एक्सप्रेस कार्ड पर यह सामने 4 अंकों में होता है। पूरा नाम: Card Verification Value या Card Verification Code। यह कोड कार्ड-नॉट-प्रेज़ेंट लेनदेन में काम आता है, यानी जब कार्ड मशीन में नहीं डाला जाता। सीवीवी पिन नहीं है। सीवीवी चिप डेटा नहीं है।

सीवीवी बेचने का सबसे सस्ता और तेज़ तरीका

सवाल का सीधा जवाब

भारत में सीवीवी बेचने का कोई वैध बाज़ार, कोई वैध दर, कोई वैध प्लेटफ़ॉर्म और कोई वैध खरीदार नहीं है। जो चैनल या साइट "कम कीमत, तेज़ डिलीवरी" का दावा करते हैं, वे तीन श्रेणियों में आते हैं। पहला: पुराना और बंद हो चुका कार्ड डेटा। दूसरा: एडवांस पेमेंट लेकर गायब हो जाने वाले ठग। तीसरा: जाल, जिसमें डेटा देने वाले का नंबर और पहचान दर्ज हो जाती है। नुकसान हमेशा भेजने वाले का होता है।

सीवीवी बेचने के लिए तेज़ भुगतान: कोई कानूनी बाज़ार नहीं

भारत में कौन से कानून लागू हैं

  • IT Act 2000 की धारा 66C: किसी और की पहचान या क्रेडेंशियल का बेईमानी से इस्तेमाल। सज़ा 3 साल तक कैद और जुर्माना।
  • IT Act 2000 की धारा 66D: कंप्यूटर संसाधन से धोखाधड़ी। सज़ा 3 साल तक कैद और जुर्माना।
  • भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 318: धोखाधड़ी। धारा 319: छद्म पहचान से धोखा।
  • RBI के नियम: कार्ड लेनदेन शृंखला में कार्ड जारीकर्ता और नेटवर्क के अलावा कोई इकाई कार्ड डेटा संग्रहीत नहीं कर सकती। सीवीवी का संग्रहण पूरी तरह बंद है।

PCI DSS क्या कहता है

PCI DSS का Requirement 3.2 कहता है कि ऑथराइज़ेशन पूरा होने के बाद संवेदनशील प्रमाणीकरण डेटा यानी CAV2, CVC2, CVV2 और CID संग्रहीत नहीं किया जा सकता। नतीजा यह है कि कोई भी वैध बैंक, गेटवे या व्यापारी सीवीवी का डेटाबेस नहीं रखता। जो समूह "बड़ा डेटाबेस" बेचने का दावा करता है, उसका स्रोत चोरी किया गया डेटा या पूरी तरह नकली डेटा होता है।

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असली लागत क्या होती है

  • बैंक खाता फ्रीज़ और KYC ब्लॉक।
  • UPI और नेट बैंकिंग सस्पेंड।
  • FIR और आपराधिक रिकॉर्ड।
  • चार्जबैक के बाद बैंक द्वारा रिकवरी।
  • डिवाइस में मालवेयर या कीलॉगर।

सीवीवी सुरक्षित रखने के तरीके

  1. सीवीवी किसी को न बताएं। कॉल, चैट, ईमेल या फॉर्म पर न भेजें।
  2. OTP किसी के साथ साझा न करें। बैंक कर्मचारी OTP नहीं मांगता।
  3. कार्ड की फोटो सोशल मीडिया या क्लाउड पर न रखें।
  4. ऑनलाइन भुगतान से पहले पता और 3D Secure पेज जांचें।
  5. शक होने पर बैंक को कॉल करें और कार्ड ब्लॉक कराएं।
  6. ठगी हो जाए तो 1930 पर कॉल करें या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।

सीवीवी कहां मिलता है

अपने ही कार्ड पर। किसी और कार्ड का सीवीवी ढूंढना, खरीदना या बेचना भारत में अपराध है। दूसरे का सीवीवी जानने का कोई कानूनी रास्ता मौजूद नहीं है।

सीवीवी बेचने के लिए सस्ती और तेज़ दुकान

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