सीवीवी बेचने वाली साइट की समीक्षा: सीवीवी क्या है
सीवीवी क्या है
सीवीवी (CVV) का अर्थ Card Verification Value है। कुछ कार्ड पर इसे CVC या CVV2 लिखा होता है। Visa, Mastercard और RuPay कार्ड पर यह कार्ड के पीछे हस्ताक्षर पट्टी के पास 3 अंकों में छपा होता है। American Express कार्ड पर यह कार्ड के सामने 4 अंकों में होता है। यह कोड ऑनलाइन भुगतान के समय यह पुष्टि करता है कि कार्ड भौतिक रूप में मौजूद है। कार्ड नंबर और समाप्ति तिथि कई जगह दर्ज रहती है, लेकिन सीवीवी गोपनीय रहता है। PCI DSS मानक के अनुसार ऑथराइज़ेशन के बाद सीवीवी संग्रहीत नहीं किया जा सकता।
सीवीवी कहाँ मिलता है
अपने कार्ड के पीछे 3 अंक, Amex कार्ड पर सामने 4 अंक। बैंक ऐप के कार्ड विवरण वाले हिस्से में। कुछ बैंक ऐप में कार्ड देखें विकल्प पर 20 से 30 सेकंड के लिए। धोखाधड़ी वाली साइटें इसी जानकारी के लिए फ़िशिंग पेज बनाती हैं जो असली बैंक जैसे दिखते हैं।
सीवीवी बेचने वाली साइटें क्या करती हैं
कुछ वेबसाइट और Telegram चैनल सीवीवी शॉप या फुल्ज़ के नाम पर कार्ड डेटा बेचते हैं। ये साइटें प्रति कार्ड कीमत बताती हैं, भुगतान क्रिप्टोकरेंसी या गिफ्ट कार्ड में लेती हैं, और बैलेंस के हिसाब से रेट तय करती हैं। ऐसा डेटा फ़िशिंग, स्किमिंग, मैलवेयर या डेटा लीक से आता है। बिक्री के बाद खरीदार दूसरे के कार्ड से खरीदारी करता है। असली कार्डधारक को पता तब चलता है जब बैंक बयान आता है।
ये साइटें अवैध क्यों हैं
भारत में किसी और का कार्ड डेटा रखना, बेचना या खरीदना अपराध है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66C पहचान की चोरी पर 3 साल तक कैद और 1 लाख रुपये तक जुर्माना तय करती है। धारा 66D कंप्यूटर संसाधन से प्रतिरूपण द्वारा ठगी पर वही सजा देती है। भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराएँ 318 और 319 ठगी तथा व्यक्ति की पहचान से छल को दंडनीय बनाती हैं। जो साइट सार्वजनिक रूप से सीवीवी बेच रही है, वह इन प्रावधानों के दायरे में आती है।
ऐसी साइट की समीक्षा करते समय क्या देखें
- भुगतान: केवल क्रिप्टोकरेंसी, गिफ्ट कार्ड या P2P ट्रांसफर के विकल्प।
- डोमेन आयु: WHOIS रिकॉर्ड में डोमेन कुछ महीने पुराना और रजिस्ट्रार डेटा छिपा हुआ।
- रेट: बैलेंस का 10 प्रतिशत जैसे रेट कार्ड धोखाधड़ी के संकेत हैं।
- संपर्क: केवल Telegram, कोई पंजीकृत कंपनी नाम, कोई GST या केवाईसी नहीं।
- शब्दावली: नो रिफंड, फर्स्ट हैंड बेस, डंप्स।
ऐसी साइट पर पैसा भेजने वाला खरीदार भी कानूनी जोखिम उठाता है। भुगतान वापस नहीं मिलता। डेटा बेचने वाला गायब हो जाता है।
भारत में रिपोर्ट और सुरक्षा
ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज होती है। हेल्पलाइन नंबर 1930 है। शिकायत जल्दी दर्ज करने पर बैंक लेनदेन रोक सकता है। कार्ड ब्लॉक कराएँ और बैंक को लिखित सूचना दें। CERT-In के 2022 निर्देशों के तहत सूचना सुरक्षा घटनाओं की रिपोर्ट 6 घंटे के भीतर देनी होती है। RBI ने 1 अक्टूबर 2022 से कार्ड टोकनाइज़ेशन लागू किया। व्यापारी 16 अंकों का कार्ड नंबर संग्रहीत नहीं करते, टोकन रखते हैं। सीवीवी किसी को न बताएं। बैंक कर्मचारी फोन पर सीवीवी नहीं मांगता।