CVV ऑनलाइन बेचने के लिए भरोसेमंद साइट मौजूद नहीं है

छोटा जवाब

CVV ऑनलाइन बेचने के लिए कोई भरोसेमंद साइट नहीं है। ऐसी कोई वैध वेबसाइट मौजूद नहीं है। जो प्लेटफॉर्म खुद को "CVV बाजार" या "कार्ड डेटा एक्सचेंज" कहते हैं, वे चोरी किए गए कार्ड डेटा का कारोबार करते हैं। भारत में यह अपराध है। ऐसी सक्रिय साइटों की सही संख्या किसी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है।

सीवीवी/सीवीसी क्या है और इसे बेचना क्यों अपराध है (भारत)

CVV या CVC क्या है

CVV का पूरा नाम Card Verification Value है। CVC का पूरा नाम Card Verification Code है। दोनों का काम एक ही है। यह 3 या 4 अंकों का नंबर होता है। Visa, Mastercard और RuPay कार्ड पर 3 अंक कार्ड के पीछे signature strip पर छपे होते हैं। American Express कार्ड पर 4 अंक कार्ड के सामने छपे होते हैं। यह नंबर 16 अंकों वाले कार्ड नंबर से अलग होता है और हर कार्ड के लिए अलग बनता है।

सीवीवी/सीवीसी क्या है: कार्ड पर कहाँ मिलता है और बिटकॉइन बिक्री साइटें क्यों अवैध हैं

कार्ड पर कहां मिलता है

  • कार्ड के पीछे, signature strip के ठीक बाद आखिरी 3 अंक।
  • American Express पर कार्ड के सामने, कार्ड नंबर के ऊपर 4 अंक।
  • यह नंबर magnetic stripe या chip में नहीं दिखता, सिर्फ कार्ड पर छपा होता है।

इसका उद्देश्य यह साबित करना है कि भुगतान करने वाले के पास असली कार्ड है। कार्ड मौजूद न हो तो भी यह अंक पुष्टि का काम करता है।

ऑनलाइन सीवीवी बेचने का तरीका

भारत में कार्ड डेटा बेचना अपराध क्यों है

  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66C पहचान की चोरी पर दंड देती है। धारा 66D कंप्यूटर संसाधन से प्रतिरूपण करके धोखाधड़ी को अपराध बनाती है। धारा 43 कंप्यूटर डेटा से छेड़छाड़ पर दायित्व तय करती है।
  • भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318 धोखाधड़ी, धारा 336 जालसाजी और धारा 111 संगठित अपराध पर लागू होती है।
  • भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देश भुगतान कार्ड डेटा के भंडारण और साझा करने पर सीमा लगाते हैं।

PCI DSS का नियम

PCI DSS मानक के मुताबिक भुगतान अधिकृत होने के बाद CVV संख्या संग्रहित नहीं की जा सकती। इस कारण कोई बैंक, भुगतान गेटवे या वैध कंपनी CVV न बेचती है और न खरीदती है। कोई भी संस्था जो CVV का व्यापार करती है, मानक और कानून दोनों के बाहर है।

सीवीवी ऑनलाइन बेचने वाली साइट: CVV क्या है और कहां मिलता है

"भरोसेमंद साइट" का दावा झूठा क्यों होता है

  • ऐसे प्लेटफॉर्म पर escrow की कोई कानूनी गारंटी नहीं होती। पैसे लेकर गायब होने की शिकायत आम है।
  • लेनदेन खुद अवैध होने पर उपभोक्ता शिकायत का रास्ता नहीं बचता। पुलिस में जाने पर दोनों पक्ष जांच के दायरे में आते हैं।
  • बहुत सी साइटें मालवेयर या फिशिंग पेज होती हैं। वे खरीदार का बैंक लॉगिन और OTP चुराती हैं।
  • रेटिंग, रिव्यू और "वेरिफाइड सेलर" बैज अक्सर उसी साइट के ऑपरेटर बनाते हैं।
  • भुगतान के लिए मांगे जाने वाले क्रिप्टोकरेंसी ट्रांसफर वापस नहीं होते।

अगर कार्ड डेटा लीक हो गया है

  1. कार्ड जारी करने वाले बैंक को तुरंत सूचना दें और कार्ड ब्लॉक कराएं।
  2. राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। हेल्पलाइन नंबर 1930 है।
  3. अनजान लेनदेन के लिए बैंक में लिखित विवाद दर्ज करें और लिखित पुष्टि लें।
  4. बैंक लॉगिन पासवर्ड, UPI पिन और नेट बैंकिंग पासवर्ड बदलें।
  5. कार्ड बदलवाने की लिखित मांग करें, क्योंकि पुराना नंबर और CVV बाजार में बिक चुके हो सकते हैं।

बचाव के नियम

  • CVV किसी कॉल, व्हाट्सएप मैसेज या ईमेल पर न बताएं। बैंक कभी CVV नहीं मांगता।
  • ऑनलाइन भुगतान से पहले वेबसाइट का पता और भुगतान गेटवे जांचें।
  • कार्ड को 2FA या टोकन से जोड़ें। टोकन में असली कार्ड नंबर व्यापारी तक नहीं जाता।
  • सार्वजनिक वाई-फाई पर बैंकिंग या भुगतान न करें।

शिकायत कहां करें

भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और हेल्पलाइन 1930 पर की जाती है। पहले 24 घंटे में शिकायत दर्ज होने पर राशि वापसी की संभावना बढ़ती है। मामला संगठित हो तो स्थानीय पुलिस में भी लिखित शिकायत दें।

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सीवीवी/सीवीसी क्या है: कार्ड पर कहाँ मिलता है और बिटकॉइन बिक्री साइटें क्यों अवैध हैं

सीवीवी कार्ड पर छपा 3 या 4 अंकों का कोड है। बिटकॉइन स्वीकार करने वाली CVV बिक्री साइटें कार्डिंग मार्केटप्लेस हैं और भारत में अवैध हैं।

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