CVV क्या है, कार्ड पर कहाँ मिलता है, और CVV बेचना क्यों गैरकानूनी है
CVV कार्ड के पीछे के 3 अंक हैं। CVV बेचने की कोई कानूनी जगह नहीं है। भारत में यह IT Act 66C, 66D और BNS 318 के तहत अपराध है।
CVV का पूरा नाम Card Verification Value है। Mastercard इसे CVC यानी Card Verification Code कहता है। यह 3 अंकों का नंबर है और कार्ड के पीछे सिग्नेचर पट्टी के पास छपा होता है। Visa, Mastercard और RuPay कार्ड पर यह 3 अंकों का होता है। American Express पर यह 4 अंकों का होता है और कार्ड के सामने दाहिनी ओर छपा होता है। इसे CID भी कहा जाता है।
यह नंबर कार्ड नंबर और ATM PIN से अलग होता है। ऑनलाइन भुगतान के समय वेबसाइट यही नंबर मांगती है ताकि यह पक्का हो सके कि कार्ड उपयोग करने वाले के पास मौजूद है।
आपकी CVV सिर्फ कार्ड पर छपी होती है। बैंक ऐप, नेट बैंकिंग, स्टेटमेंट या SMS में यह नंबर नहीं दिखता। अगर कोई कहता है कि वह आपको CVV बता या भेज सकता है, तो वह झूठ है।
PCI DSS नियम के मुताबिक किसी भी दुकानदार या पेमेंट कंपनी को भुगतान के बाद CVV सेव करने की इजाजत नहीं है। इसलिए कोई भी वैध वेबसाइट आपकी CVV आपको वापस नहीं दिखा सकती।
इंटरनेट पर ऐसे पन्ने मिलते हैं जो दावा करते हैं कि वे दूसरों के कार्ड की CVV कम दाम पर बेचते हैं। ये नंबर चोरी के होते हैं। इन्हें बेचना और खरीदना, दोनों अपराध हैं। ऐसी वेबसाइटें किसी बैंक, कार्ड नेटवर्क या RBI से मान्यता प्राप्त नहीं होतीं।
इनमें से ज्यादातर पन्ने जाली होते हैं। भुगतान क्रिप्टोकरंसी या UPI से लिया जाता है, फिर डेटा नहीं मिलता। कुछ मामलों में नकली डेटा दिया जाता है, और कुछ में खरीदने वाले का नंबर, नाम और पता जमा हो जाता है। उसके बाद जबरन वसूली की शिकायतें दर्ज होती हैं।
IT Act 2000 की धारा 66C पहचान की चोरी और धारा 66D कंप्यूटर संसाधन के इस्तेमाल से ठगी पर लागू होती है। भारतीय न्याय संहिता 2023 में जालसाजी और ठगी की धाराएं भी लगती हैं। कार्ड डेटा चुराना, बेचना या खरीदना इस दायरे में आता है। सजा और जुर्माना दोनों का प्रावधान है।
RBI के नियम के मुताबिक बैंक कर्मचारी कभी CVV, PIN या OTP नहीं मांगते। कोई भी ऐसा कॉल या मैसेज धोखाधड़ी है।
पैसा डूबने के अलावा मालवेयर का खतरा रहता है। लेनदेन का रिकॉर्ड बैंक और जांच एजेंसी तक पहुंचता है। नाम सामने आने पर खाता फ्रीज, कार्ड बंद और क्रेडिट रिपोर्ट खराब हो सकती है। धोखाधड़ी में सहयोग करने पर आरोप भी बनता है।
ऑनलाइन भुगतान के लिए UPI, कार्ड टोकनाइजेशन, बैंक का वर्चुअल डेबिट कार्ड और नेट बैंकिंग उपलब्ध हैं। इनमें CVV किसी तीसरे पक्ष को बताने की जरूरत नहीं पड़ती। नई वेबसाइट पर भुगतान से पहले उसका पंजीकरण, संपर्क पता और रिफंड नीति देख लें। यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है, किसी वेबसाइट की सिफारिश नहीं।
CVV कार्ड के पीछे के 3 अंक हैं। CVV बेचने की कोई कानूनी जगह नहीं है। भारत में यह IT Act 66C, 66D और BNS 318 के तहत अपराध है।
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