सीवीवी खरीदें या डंप लें: कानून और जोखिम

छोटा जवाब

CVV खरीदना या डंप के रूप में बेचना भारत में अपराध है। यह चोरी किए गए कार्ड डेटा का कारोबार है। इसमें पैसा लगाने वाला और बेचने वाला, दोनों पर मुकदमा बनता है। इस गाइड में हम बाज़ार के तरीके नहीं बताते। हम केवल CVV की परिभाषा, उसकी जगह, लागू कानून और सुरक्षा के कदम बताते हैं।

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CVV और CVC क्या होता है

CVV का पूरा नाम Card Verification Value है। Mastercard इसे CVC यानी Card Verification Code कहता है। यह 3 या 4 अंकों का कोड है। यह कार्ड पर छपा होता है और ऑनलाइन भुगतान में कार्ड की असलियत जाँचने के लिए इस्तेमाल होता है। पहला CVV कार्ड की चुंबकीय पट्टी में एनकोड रहता है। दूसरा CVV2 कार्ड की सतह पर छपा रहता है। चिप कार्ड में iCVV होता है।

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  • Visa, Mastercard और RuPay: कार्ड के पीछे 3 अंक।
  • American Express: कार्ड के सामने 4 अंक।
  • CVV कार्ड नंबर नहीं है। यह अलग डेटा है।

CVV जायज़ तौर पर कहाँ मिलता है

CVV केवल तीन जगह मिलता है: आपका असली कार्ड, आपके बैंक का अधिकृत ऐप या नेट बैंकिंग, और भुगतान के समय आपका अपना टाइप किया हुआ कोड। बैंक, कस्टमर केयर और कोई भी वेबसाइट कभी फोन या चैट पर CVV नहीं माँगती। जो टेलीग्राम ग्रुप, फोरम या साइट CVV, डंप या फुल्ज़ बेचने का दावा करती है, वह धोखाधड़ी है।

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डंप और फुल्ज़ का मतलब

डंप कार्ड की चुंबकीय पट्टी का डेटा होता है। फुल्ज़ में कार्ड नंबर, CVV, नाम और पता जैसी जानकारी होती है। यह डेटा डेटा चोरी, स्किमिंग या फिशिंग से निकलता है। भारत में ऐसे डेटा का रखना, खरीदना और बेचना तीनों गैरकानूनी हैं।

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कानून क्या कहता है

  • IT Act 2000 की धारा 66C: किसी दूसरे की पहचान संबंधी जानकारी चुराना। सज़ा 3 साल तक कैद या जुर्माना या दोनों।
  • IT Act 2000 की धारा 66D: कंप्यूटर संसाधन से ठगी। सज़ा 3 साल तक कैद और जुर्माना।
  • IT Act 2000 की धारा 43: अधिकृत बिना कंप्यूटर डेटा का इस्तेमाल। मुआवज़ा देना पड़ता है।
  • भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराएँ जैसे ठगी और जालसाजी से जुड़े प्रावधान भी लागू होते हैं।
  • Payment and Settlement Systems Act 2007 भुगतान प्रणाली के दुरुपयोग पर लागू होता है।

RBI नियम और टोकनाइज़ेशन

RBI के निर्देश के बाद 1 अक्टूबर 2022 से व्यापारी और भुगतान ऐप ग्राहक का असली कार्ड डेटा सेव नहीं कर सकते। उसकी जगह टोकन बनता है। PCI DSS मानक कहता है कि ऑथराइज़ेशन के बाद CVV समेत संवेदनशील ऑथेंटिकेशन डेटा स्टोर करना मना है। इससे डेटा चोरी की गुंजाइश घटती है।

डंप खरीदने पर क्या होता है

  • बेचने वाला पैसा लेकर गायब हो जाता है। डेटा फर्ज़ी होता है।
  • आपका नाम जुड़ जाता है। बैंक खाता फ्रीज़ हो सकता है।
  • ब्लैकमेल होने का खतरा रहता है।
  • FIR दर्ज होने पर कैद और जुर्माना दोनों का जोखिम रहता है।

अगर आपका CVV लीक हो जाए

  1. तुरंत बैंक को कॉल करके कार्ड ब्लॉक करवाएँ।
  2. बिना पहचान वाले सौदों की जाँच करें और लेनदेन की सूची माँगें।
  3. national cyber crime reporting portal पर शिकायत दर्ज करें या हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।
  4. नया कार्ड माँगें। CVV पुराने कार्ड पर नहीं बदला जा सकता।
  5. OTP और PIN किसी से साझा न करें।

आम सवाल

क्या CVV किसी को बताना कभी जायज़ है

नहीं। बैंक, दुकानदार और पुलिस में कोई भी CVV, OTP या PIN नहीं माँगता। भुगतान पेज पर खुद टाइप करना ही सही तरीका है।

क्या CVV बदल सकते हैं

नहीं। CVV कार्ड बनते समय तय होता है। बदलने के लिए नया कार्ड लेना पड़ता है।

क्या डंप की कीमत या सोर्स जाननी ज़रूरी है

नहीं। यह अवैध बाज़ार है और यहाँ ऐसी जानकारी नहीं दी जाती। जो साइट या ग्रुप ऐसा सौदा दिखाए, उसकी सूचना साइबर सेल को दें।

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