CVV Website User Review हिंदी | CVV/CVC क्या है, कहाँ मिलता है

पहला चुनाव: अपना कार्ड और बैंक ऐप

CVV देखने का सही स्रोत आपका कार्ड है। दूसरा स्रोत आपके बैंक का मोबाइल ऐप या नेट बैंकिंग है। दोनों पर नंबर मुफ्त में दिखता है। कोई रजिस्ट्रेशन नहीं, कोई पेमेंट नहीं।

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यह पहला विकल्प क्यों है

यहाँ CVV कार्ड जारी करने वाले बैंक के रिकॉर्ड से आता है। कार्ड नेटवर्क और बैंक का सर्वर इसी नंबर को जांचता है। इसलिए सफलता की गुंजाइश 100 प्रतिशत होती है। दूसरी कोई विधि यह जानकारी नहीं देती।

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बाकी विकल्प

  • कार्ड का पिछला हिस्सा: सिग्नेचर पैनल के पास छपे 3 अंक। American Express पर 4 अंक कार्ड के सामने।
  • बैंक ऐप: "कार्ड डिटेल्स" या "कार्ड देखें" सेक्शन। ओटीपी पुष्टि के बाद CVV दिखता है।
  • नेट बैंकिंग: कार्ड मैनेजमेंट पेज पर डेबिट और क्रेडिट कार्ड की डिटेल।
  • बैंक शाखा या कस्टमर केयर: कार्ड खो जाने पर रीप्लेसमेंट कार्ड मिलता है। पुराना CVV नई कार्ड पर लागू नहीं होता।
  • "CVV जनरेटर" वेबसाइटें: नंबर बनाती हैं, चलाती नहीं। ये विकल्प नहीं हैं।

CVV/CVC क्या है

CVV का पूरा नाम Card Verification Value है। Mastercard इसे CVC (Card Verification Code) कहता है। नंबर 3 अंक का होता है। अमेरिकन एक्सप्रेस पर 4 अंक। यह नंबर कार्ड नंबर, एक्सपायरी डेट और सर्विस कोड से बनता है। कार्ड बनने के समय यह तय हो जाता है। यह कार्ड पर कहीं लिखा होता है और कार्ड बदलने तक नहीं बदलता। CVV ऑनलाइन भुगतान में इस्तेमाल होता है। ATM और POS मशीन पर पिन चलता है, CVV नहीं।

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CVV कहाँ मिलता है

ज्यादातर कार्ड पर CVV पीछे की तरफ होता है। कार्ड नंबर की पट्टी और सिग्नेचर पैनल के पास 3 अंक छपे होते हैं। कुछ कार्ड पर पीछे 4 अंक दिखते हैं, उनमें से 3 अंक CVV होते हैं। अमेरिकन एक्सप्रेस पर 4 अंक कार्ड के सामने, कार्ड नंबर के ऊपर होते हैं। जगह कार्ड पर निर्भर है, इसलिए अपने बैंक के कार्ड पर खुद देखें। फोन पर किसी को CVV न बताएं। बैंक कभी CVV नहीं मांगता।

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"CVV वेबसाइट" की समीक्षा

कुछ साइटें दावा करती हैं कि वे CVV देती हैं या पैसे लेकर जनरेट करती हैं। ऐसी साइटें काम नहीं करतीं। वजह सीधी है। CVV गणित से बनाया जा सकता है, लेकिन भुगतान गेटवे नंबर की तुलना कार्ड जारी करने वाले बैंक के रिकॉर्ड से करता है। मेल नहीं खाने पर ट्रांजैक्शन फेल हो जाता है। किसी फर्जी नंबर का कोई फायदा नहीं।

दूसरा खतरा पैसा और डेटा है। ऐसी साइटें कार्ड नंबर, पिन, ओटीपी मांगती हैं। यही डेटा चोरी होता है। भारत में कार्ड डेटा खरीदना, बेचना या दूसरे का कार्ड इस्तेमाल करना अपराध है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 66C (पहचान की चोरी) और 66D (धोखाधड़ी) के तहत मुकदमा बनता है।

RBI का टोकनाइज़ेशन नियम

भारतीय रिजर्व बैंक ने कार्ड-ऑन-फाइल टोकनाइज़ेशन का नियम 1 अक्टूबर 2022 से लागू किया। अब कोई व्यापारी या वेबसाइट अपने सर्वर पर आपका कार्ड नंबर और CVV सेव नहीं कर सकती। हर व्यापारी को कार्ड नेटवर्क से टोकन लेना पड़ता है। टोकन एक बेनाम कोड है, असली नंबर नहीं। यही नियम उन साइटों को भी लागू होता है जो नंबर बेचने का दावा करती हैं।

सुरक्षा जांच सूची

  • पेमेंट पेज का पता https:// से शुरू हो और पता सही हो।
  • कोई भी वेबसाइट CVV के बदले फीस न मांगे।
  • OTP किसी के साथ साझा न करें। बैंक का कर्मचारी भी OTP नहीं मांगता।
  • कार्ड पर मैग्नेटिक स्ट्रिप और CVV छिपाने वाला स्टिकर लगाएं।
  • ऑनलाइन भुगतान के लिए वर्चुअल कार्ड या टोकन इस्तेमाल करें।
  • बैंक ऐप में ट्रांजैक्शन अलर्ट और लिमिट चालू रखें।

ठगी होने पर क्या करें

  1. तुरंत बैंक को कॉल करें और कार्ड ब्लॉक कराएं।
  2. 24 घंटे के भीतर राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
  3. हेल्पलाइन 155260 पर कॉल करें।
  4. लेनदेन की तारीख, रकम और रेफरेंस नंबर लिखकर रखें।

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