सीवीवी खरीदने के लिए वेबसाइट की समीक्षा: कोई वैध साइट नहीं

सीवीवी खरीदने के लिए वेबसाइट की समीक्षा: कोई वैध वेबसाइट नहीं है

सीवीवी खरीदने के लिए कोई वैध वेबसाइट मौजूद नहीं है। जो साइटें या Telegram चैनल सीवीवी बेचते हैं, वे चोरी किए गए कार्ड डेटा पर चलते हैं। भारत में ऐसा लेन-देन IT Act 2000 की धारा 66C और 66D के तहत अपराध है। खरीदने वाला भी आपराधिक मामले में आरोपी बन सकता है। इसलिए ऐसी किसी वेबसाइट की समीक्षा, रेटिंग या रिव्यू का कोई भरोसेमंद आधार नहीं है।

सीवीवी खरीदने के लिए वेबसाइट की समीक्षा

सीवीवी क्या है

CVV का पूरा नाम Card Verification Value है। यह कार्ड पर छपा 3 या 4 अंकों का कोड होता है। Visa, Mastercard और RuPay कार्ड पर 3 अंक पीछे की सिग्नेचर पट्टी के पास होते हैं। American Express पर 4 अंक सामने होते हैं और उसे CID कहा जाता है। ऑनलाइन भुगतान के समय मांगे जाने वाले कोड को CVV2 कहा जाता है।

सीवीवी खरीदने के लिए वेबसाइट की समीक्षा

सीवीवी कहां मिलता है

  • कार्ड के पीछे, सिग्नेचर पट्टी के बगल में तीन अंक।
  • American Express कार्ड पर सामने दाईं ओर चार अंक।
  • बैंक की ऐप या नेट बैंकिंग के कार्ड डिटेल्स सेक्शन में, अगर बैंक यह दिखाता है।
  • कार्ड जारी करने वाले बैंक के कस्टमर केयर से, पहचान सत्यापन के बाद।

CVV कभी ईमेल, SMS या चैट पर साझा नहीं किया जाता। बैंक कॉल करके CVV नहीं मांगता।

ऑनलाइन सीवीवी खरीदने की वेबसाइट: सीवीवी क्या है और कहाँ मिलता है

सीवीवी बेचने वाली साइटों के संकेत

  • भुगतान के लिए सिर्फ क्रिप्टोकरेंसी या गिफ्ट कार्ड मांगना।
  • लाइव बैलेंस या बल्क रेट जैसे शब्द इस्तेमाल करना।
  • Telegram, Discord या WhatsApp ग्रुप से ऑर्डर लेना।
  • कोई KYC नहीं, कोई GST नंबर नहीं, कोई पंजीकृत पता नहीं।

ऐसी साइट आमतौर पर पैसे लेकर गायब हो जाती है या खरीदार का डेटा भी आगे बेच देती है।

सीवीवी खरीदने वाली वेबसाइट ऑनलाइन: तथ्य, कानून और जोखिम

कानून क्या कहता है

IT Act 2000 की धारा 66C में पहचान संबंधी डेटा की चोरी पर तीन साल तक की कैद या एक लाख रुपये तक का जुर्माना है। धारा 66D में कंप्यूटर संसाधन से धोखाधड़ी पर तीन साल तक की कैद या एक लाख रुपये तक जुर्माना है। BNS 2023 की धारा 318 के तहत धोखाधड़ी पर सात साल तक की सजा हो सकती है। RBI ने 2009 से घरेलू कार्ड-नॉट-प्रेजेंट लेनदेन के लिए अतिरिक्त प्रमाणीकरण अनिवार्य किया है। PCI DSS नियम 3.2 के तहत व्यापारी ऑथराइजेशन के बाद CVV सेव नहीं कर सकते।

धोखाधड़ी हो जाए तो क्या करें

  1. कार्ड जारी करने वाले बैंक को कॉल करके कार्ड ब्लॉक कराएं।
  2. साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर रिपोर्ट करें।
  3. cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
  4. बैंक से लिखित शिकायत लें और ट्रांजैक्शन रेफरेंस नंबर सेव रखें।

सुरक्षित विकल्प

ऑनलाइन भुगतान के लिए UPI, नेट बैंकिंग, टोकनाइज्ड कार्ड या वॉलेट इस्तेमाल करें। टोकनाइजेशन में असली कार्ड नंबर व्यापारी के साथ साझा नहीं होता। RBI के निर्देश के तहत व्यापारी असली कार्ड डेटा सेव नहीं कर सकते।

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